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Pollution’s solutions

प्रदूषण से बचाव के उपाय

Save your earth

Save your life

ATTENTION PLEASE YOUR LIFE IN DANGER          

PLEASE SAVE YOUR LIFE

कृपया ध्यान दें आप की जिंदगी खतरे में है।

 अपनी जिंदगी बचाए।

    

 यह पोस्ट इस धरती में बढ़ते हुए प्रदूषण के कारण प्रभाव और प्रदूषण को किस तरह दूर किया जा सकता है ,उसके  उपाय के बारे में है। प्रदूषण से हर देश हर व्यक्ति और हर जीव हर वस्तु पीड़ित है। इससे प्रदूषण फैलाने वाले ही नहीं बल्कि वह भी पीड़ित है जो प्रदूषण तक नहीं फैलाते लेकिन प्रदूषित जगह में रह रहे है या प्रदूषित जगह पर जाते है। इस लेख में एक छोटी लड़की जो एक भारतीय फौजी की बेटी है अपनी कहानी लिखती है,वह इस पत्र के जरिए हर व्यक्ति से प्रार्थना करती है, कि लोगों को प्रदूषण कम करना चाहिए , और इसमें उसने प्रदूषण से होने वाले नुकसान ,कारण और प्रदूषण को खत्म करने के उपाय बताए  हैं।

               तालिका

1.छोटी लड़की का पत्र

2.प्रदूषण क्या है ? प्रभाव और कारण

प्रदूषण से बचने के उपाय और विकल्प।

3.हम सब प्रदूषण से बचने के लिए क्या कर सकते हैं।

5.प्रदूषण संबंधित रिपोर्ट

4.प्रदूषित जगह पर हम अपना बचाव कैसे कर सकते हैं‌।

6. यदि प्रदूषण कम नहीं हुआ तो हमारी आने वाली पीढ़ी को नुकसान हो सकता है। हमारा भविष्य

इस प्यारी सी दुनिया में रहने वाले मेरे प्यारे भाई बहनों,

आप सब को मेरा नमस्कार ।

हम सब इस दुनिया में रहते हैं ,जिसका नाम धरती है, इस धरती ने हमें बहुत कुछ दिया है जो जीने के लिए हम सबके लिए आवश्यक है। मिट्टी जिससे पेड़ पौधे उगाए जाते हैं उनको कि जिनके फल और सब्जी खाकर हम अपना पेट भरते हैं। ताजी हवा जिससे हम सांस लेते हैं ।आग जो हमें गर्मी प्रदान करती है। पानी जो हमारे पीने के और भी कई आवश्यक कार्य में काम आता है। गगन जो एक सुरक्षात्मक पर्यावरण प्रदान करता है।

 लेकिन हमने इस धरती को क्या दिया? हमने इस खूबसूरत दुनिया को अपने स्वार्थ के लिए दूषित और खराब कर दिया। हम आज उस मोड़ पर आ गए हैं कि हमारी जिंदगी खतरे में पड़ गई है। अब हमें सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। हर चीज में प्रदूषण भर गया है। अब ना हम अच्छा खा सकते हैं ना ही अच्छी हवा में सांस ले सकते हैं। कई तरह की लाइलाज़ बीमारियां होने लगी है। लोग घुट घुट कर मर रहे है, लेकिन फिर भी किसी का उस पर ध्यान नहीं है। लोगों की उम्र कम हो गई है।

इससे एक व्यक्ति एक देश ही पीड़ित नहीं है बल्कि पूरी धरती के लोग  पीड़ित है। और परेशान है।

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मेरे प्यारे साथियों  मैं आपको बता देना चाहती हूं। हम सब की जिंदगी खतरे में है। समय-समय पर प्राकृतिक आपदा से इस धरती का विनाश होने लगा  है। हम सब का जीवन मुश्किल में है। हर व्यक्ति चाहे प्रदूषण करने में भागीदार हो या ना हो लेकिन प्रदूषण की वजह से किसी ना किसी बीमारी से पीड़ित है। अभी यह हाल है तो  इस धरती के भविष्य का क्या होगा।

मेरे प्यारे साथियों मैं एक फौजी की बेटी हूं और मैं गांव में रहती हूं ।

मैं कक्षा दसवीं में पढ़ती हूं । मेरा आपसे एक प्रश्न है,जिसका मैं जवाब आप सभी से चाहती हूं  क्या आप में से कोई मुझे बताएगा कि क्या यह देश , यह धरती , यह दुनिया सिर्फ फौजी भाइयों की ही है ? मित्रों अभी कुछ दिनों पहले मेरे पिताजी की मृत्यु हो गई थी जो कि एक फौजी थे उन्होंने एक आपदा के दौरान अपनी जान की बाजी लगाकर कई बच्चों ,औरतों को बचाया और खुद ही शहीद हो गए ।

उनके जाने के बाद हम अनाथ हो गए। हमारे घर में मैं अपने भाई बहनों में सबसे बड़ी हूं।मैं स्कूल जाती हूं लेकिन पिताजी के जाने के बाद मम्मी की तबीयत खराब हो गई। मेरी मां यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाई और बीमार पड़ गई। उनकी देखभाल के लिए फिर मुझे स्कूल छोड़ना पड़ा। मेरे पास स्कूल की अध्यापिका का फोन आया था वह मुझे स्कूल में बुला रही थी लेकिन मै कैसे स्कूल जाऊं?

आप तो जानते हो मेरे पिताजी फौजी थे और वही हमारा सहारा थे । उनके  जाने के बाद मेरे परिवार की जिम्मेदारी उठाने वाला कोई नहीं है। मैं ही अपने बहन भाइयों में सबसे बड़ी हूं। अगर मैं स्कूल जाऊंगी तो मां को कौन चुप कराएगा ,  दादी को कौन खाना खिलाएगा ,बहन को कौन समझाएगा पैसे कमा कर कौन लाएगा ,घर का खर्च कैसे चलेगा खाना कौन बनाएगा।  जब से पिताजी गए है दादी रोती रहती है‌। मम्मी बीमार रहती है। दादाजी आज भी पापा को ही आवाज लगाते हैं ।पापा के नाम से ही हम सब को जगाते हैं । मेरे पिताजी मुझे एक अध्यापिका बनाना चाहते थे ।और वह चाहते थे कि मैं गरीब बच्चों को मुफ्त में पढ़ाऊ, मैंने अपने पापा का सपना पूरा करने के लिए पढ़ाई में पूरी मेहनत करी और मैं हमेशा कक्षा में प्रथम आती थी। कभी भी शिकायत का कोई मौका नहीं दिया। पर अब क्या करूं भाइयों घर का भी ध्यान रखना है मां का भी ध्यान रखना है भाई को भी पढ़ाना है।मेरे पिताजी मेरे दादा जी और दादी जी की अकेली संतान थी। जब मैं छोटी थी तो दादी बताती थी कि  दादी पापा के बिना एक दिन भी नहीं रहती थी और पापा को तो दादी के बिना बुखार ही चढ जाता था। अब आप ही सोचिए कौन सा पत्थर दिल रख कर  मेरी दादी ने पिताजी को आर्मी के लिए भेजा होगा किस  दिल से पिताजी आर्मी में गए होंगे पिताजी का देश की सेवा करने का जुनून ही उन्हें दादा दादी से दूर ले गया और इस बात का दादा दादी को और हम सब को गर्व है।

जरा सी देर हो जाए अपने ना आए तो हम बेचैन हो जाते है। उनके दिलो से पूछो उनके ऊपर क्या बीतती होगी।

जिनके बच्चे कभी वापस नहीं आए।

 एक बात बताइए क्या यह देश सिर्फ फौजी भाइयों का है किसी नागरिक का नहीं किसी भी नागरिक की अपने देश और दुनिया को बचाने की जिम्मेदारी नहीं है क्या? सिर्फ फौजी का ही काम है फौजी हमेशा कहते हैं की मेरा सपना यह है की अपने देश की  रक्षा करूंगा या मैं ऐसा कोई काम नहीं करूंगा जिससे मेरे देश या दुनिया को कोई नुकसान हो ।

लेकिन आम नागरिक को हमेशा सिर्फ पैसा कमाना अपने परिवार को पालना ही होता है सभी के  मां-बाप यह चाहते हैं कि उनका बच्चा उनका नाम रोशन करे पैसा कमाए उसके पास सारी सुख सीधा हो सुविधा हो लेकिन कोई यह नहीं चाहता कि उनका बच्चा देश का भी नाम रोशन करें देश के लिए भी कुछ करें।  हमें अपने पिताजी पर गर्व है और मुझे अपने सभी फौजी भाइयों पर गर्व है। पर भाइयों  एक बात बताओ क्या यह देश सिर्फ फौजी भाइयों का ही है क्या यह देश नेताओं का नहीं है? जो अपने लालच की वजह से देश में दंगे फसाद कराते हैं। देश में लड़ाई कराते हैं ।आपस में लड़ते झगड़ते हैं ? क्या यह एक आम नागरिक का नहीं है? जो सिर्फ अपना सोचता है‌।अपने परिवार के बारे में सोचता है अपनी खुशियों के बारे में सोचता है। वह कभी भी देश के बारे में नहीं सोचते भाइयों एक बात बताइए क्या फौजियों की कोई जात नहीं होती क्या उनको कोई धर्म नहीं होता सभी लोग आपस में जात-पात करते रहते हैं। लड़ते रहते हैं। लेकिन फौजी भाई कभी भी जात पात को नहीं मानते उनका धर्म सिर्फ देश की रक्षा करना होता है। देश की सुरक्षा करना होता है। देश का ध्यान रखना होता है।

मुझे ध्यान है जब मैं पहली बार माध्यमिक स्कूल में गई थी तो अध्यापिका ने हम सब बच्चों से पूछा था कि कौन क्या बनना चाहता है।  तब सब बच्चों ने कहा था कि हम डॉक्टर बनना चाहते हैं। वकील बनना चाहते हैं। पैसा कमाना चाहते हैं ।अपने मां बाप का नाम रोशन करना चाहते हैं लेकिन किसी ने भी नहीं कहा कि हमें फौजी बनना है हमें देश की रक्षा करनी है। हम देश की तरक्की के लिए काम करेंगे।

भाइयों क्या यह दुनिया सिर्फ फौजियों की  ही है? क्या हर जगह फौजी की बलिदान देंगे? मेरे देश के फौजी ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के फौजी के सामने जब भी देश को लेकर कोई भी समस्या आती है चाहे वह प्राकृतिक आपदाओं या कोई समस्या हो या किसी और देश की वजह से किया गया किया गया आक्रमण हो  लेकिन फिर भी वह अपने देश की जान बचाने के लिए अपनी जान निछावर कर देते हैं। वह एक बार भी अपने परिवार या अपने लिए नहीं सोचते तो क्या सिर्फ देश और दुनिया का जिम्मा सिर्फ फौजियों का ही है किसी नागरिक का नहीं है उनके कोई जिम्मेदारी नहीं है क्या? हमेशा फौजी ही बलिदान देंगे कोई नागरिक अपने देश के बारे में या अपनी धरती के बारे में नहीं सोचेगा सब इतने क्यों सवार्थी हो गए है।

 मेरे पिताजी फौजी थे और वह दुश्मनों से युद्ध करते हुए मारे गए मुझे अपने पिता के फौजी होने पर गर्व है। उन्होंने हमेशा देश की रक्षा के लिए देश की सुरक्षा के लिए कभी भी गर्मी सर्दी आंधी तूफान नहीं देखा यहां तक कि उन्होंने अपने परिवार की भी फिक्र नहीं की ऐसा ही सभी फौजी भाई करते हैं ।मुझे याद है हमने कोई भी त्यौहार अपने पिता के साथ नहीं बनाया वह अक्सर  त्योहारों पर अपनी ड्यूटी पर होते थे अन्य लोग सभी अपने परिवार के साथ त्यौहार मनाते थे। लेकिन हमारे परिवार में सभी इस बात से खुश थे कि वह देश की सुरक्षा के लिए अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। हमें उन पर गर्व है।  मैं भी अपने भाई को एक फौजी ही बनाना चाहती हूं ।मेरा छोटा भाई बड़ा होकर फौजी बनना चाहता है। और मेरे पिता की भी यही इच्छा थी लेकिन आजकल वह बीमार है ।उसको अस्थमा हो गया है गांव में किसान जोकि अन्नदाता कहलाते हैं थोड़े से स्वार्थ के कारण अपने खेत जला रहे है। जिसके कारण सभी गांव में और शहरों में में प्रदूषण हो रहा है । उस प्रदूषण के कारण मेरे भाई को भी अस्थमा हो गया है। जब किसान से पूछा गया कि तुमने खेत क्यों जलाए तो उसने कहा कि उसके पास इतना पैसा नहीं है कि वह फसल को कटवा सके और सरकार ने भी उसको कोई सहायता नहीं दी इसलिए उसने खेत जला दिए और इस बात की भी परवाह नहीं की कि इससे पर्यावरण को कितना नुकसान होगा उसके खुद के परिवार को और पूरे गांव शहर देश और दुनिया को कितना नुकसान होगा।

एक बात बताइए क्या यह देश सिर्फ फौजियों का ही है। जो फौजी अपना स्वार्थ नहीं देखते अपने बीवी बच्चों को नहीं देखते अपनी जान की परवाह नहीं करते और यह किसान लोग जो कि अन्नदाता कहलाते हैं। फिर भी खेत  थोड़े से पैसे बचाने के लिए यह अपने बच्चों का पेट पालने के लिए दूसरों के बच्चों को जहर पिला रहे है। आखिर ऐसा क्यों मुझे याद है जब पिताजी को  बुलावा आता था आता था  तो वह हमें बिना बताए चले जाते थे हम हमें कई दिन तक वह नहीं मिलते थे। हम उनके बिना ही बिताते थे मेरे पिताजी की इतनी भी तनख्वाह नहीं थी कि हम एक मकान भी बना सके हमें कच्चे मकान में रहते हैं। फिर भी हमें अपने पिताजी पर और अपने फौजी भाइयों को गर्व है। लेकिन क्या देशवासियों का कोई फर्ज नहीं होता सभी अपने-अपने स्वार्थ के लिए क्यों देश और दुनिया को को प्रदूषण के कारण बर्बाद कर रहे हैं सब के सब स्वार्थी है। वैज्ञानिकों ने भी इतने अविष्कार किए दुनिया चांद,मंगल ग्रह तक पहुंच गई लेकिन प्रदूषण का कोई भी स्थाई इलाज नहीं सकी। हमारे पूर्वजों ने हमें बहुत सारा ज्ञान दिया जानकारी दी प्रकृति ने हमें खनिज संपदा दी  हम लोग अपने बच्चों के भविष्य के लिए क्या छोड़कर जा रहे हैं उनके भविष्य में क्या होगा सिर्फ क्या प्रदूषण होगा । हम क्या उनके लिए सिर्फ प्रदूषण और जहरीली हवा ही छोड़कर जाएंगे।

 आखिर सब लोग स्वार्थी क्यों है

राजनेता

अगर मैंने प्रदूषण करने वाली फैक्ट्री बंद करवा दी तो वह मुझे वोट नहीं देंगे और ना ही मुझे डोनेशन देंगे मैं मजबूर हूं।

व्यापारी

 मैं क्या करूं अगर मैंने फैक्ट्र बंद कर दी तो मैं भूखा मर जाऊंगा मेरे परिवार का क्या होगा?

सामान्य लोग

अगर हम इस चीज का प्रयोग नहीं करेंगे हम इन सुविधाओं का प्रयोग नहीं करेंगे तो हम उन चीजों से वंचित रह जाएंगे हम मजबूर हैं। हमारे पास इसके अलावा कोई साधन नहीं है और चीजें बहुत महंगी है।

फौजी

ऑफिसर तुम्हें एक जाना है तुम एक मिशन पर जाना है वहां पर हो सकता है तुम्हें खाना ना मिलेगा  तुम्हारी जान को भी खतरा हो सकता है। तुम मर भी सकते हो वहां तुम्हें लोग पकड़ भी सकते हैं। तुम्हारे ऊपर अत्याचार भी होंगे क्या तुम तैयार हो तुम्हें अपने बच्चों और परिवार से दूर रहना पड़ेगा तुम वहां से कोई खत नहीं लिख सकते ना कोई संदेश भेज सकते हो ना किसी से बात करनी है। तुम अपने परिवार से कभी भी ना मिल पाओ क्या तुम तैयार हो?

यस सर 

कोई सवाल

नहीं सर मैं जाने के लिए तैयार हूं।

 लेकिन हमें इस बात का कोई दुख नहीं है बल्कि हमें गर्व है हमें अपने पिताजी पर गर्व है। कि उन्होंने कभी भी किसी  का किसी का कोई भी नुकसान नहीं किया बल्कि उन्होंने इस देश का भविष्य बनाने के लिए अपनी जान लगा दी लेकिन किसान भाई तो अपने परिवार में रहते हैं क्या वह बच्चों के लिए थोड़ा सा खर्च नहीं कर सकते थोड़ी मेहनत नहीं कर सकते सब अपनी मजबूरी बता देते हैं। सरकार अपनी मजबूरी बताती है किसान अपनी मजबूरी बता रहा है। लोग अपनी मजबूरी बता रहे हैं लेकिन कोई करने वाला नहीं है व्यापारी अपनी मजबूरी बताते हैं पता नहीं क्यों सब चुप है। किसी के ऊपर क्यों नहीं कार्रवाई होती कोई क्यों नहीं अपनी जिम्मेदारी समझता पता नहीं जो सभी चुप है।

प्रदूषण से मेरा देश ही नहीं  बल्कि पूरी दुनिया ग्रसित है ।विकसित और विकासशील देश  तरक्की के नाम पर देश और दुनिया  की हवा में जहर फैला रहे हैं जोकि पूरी दुनिया के लिए हानिकारक है। उन्हें भी पता है की यह हम सब को नुकसान देगी।

जीव जंतु मनुष्य पेड़ पौधे वस्तु यह सभी के लिए हानिकारक है लेकिन कुछ पैसों के  लालच, में कुछ जल्दी काम करने,  कम मेहनत करने के लालच में, वह हमारा भविष्य मौत के मुंह में  डाल रहे है कुछ वर्षों पहले पूरी दुनिया कभी किसी की गुलाम रही या किसी  वजह से धरती पर परेशानी आती रही लेकिन अब तो हमने काफी  विकास कर लिया है। पहले  हम सभी के पास ज्ञान नहीं था। लेकिन अब वैज्ञानिकों के पास ज्ञान हैऔर उन्हें जानकारी है कौन सी चीज फायदेमंद है कौन सी चीज हमें भविष्य में नुकसान पहुंचा सकती है उसके बावजूद भी नेता बिजनेसमैन और मनुष्य थोड़े से पैसों के लालच के लिए हमारे भविष्य से खिलवाड़ कर रहे है और मैं इस बात से चिंतित हूं अभी से लोगों को मुंह पर मास्क लगा कर चलना पड़ता है तो कुछ सालों बाद तो पूरे शरीर पर ही ऐसे कपड़े पहनने होंगे जोकि शरीर को हानि ना दे वायु और भी जहरीली हो जाएगी बच्चों को स्कूल बैग से ज्यादा भारी हेलमेट और मास्क लेकर चलने पड़ेंगे।

छोटे बच्चे

हमें भी जीने का हक है इतनी छोटी सी उम्र में हमें अस्थमा जुखाम स्किन एलर्जी जैसी बीमारियां हो रही है। कृपया प्रदूषण कम करें हमारे भविष्य क्या की चिंता करें अभी हाल है तो भविष्य में क्या होगा।

जीव जंतु

हम तुम्हारे लिए जीते हैं हम घास फूस का घर अपना गुजारा करते हैं कृपया प्रदूषण में फैलाएं हमें भी जीने का हक है।

बड़े बूढ़े हमें भी जीने का हक है हम सांस नहीं ले पा रहे हैं दवाइयों के सारे हमें जीना पड़ रहा है कृपया प्रदूषण  फैलाएं ।

सामान्य  नागरिक।

हम अपनी आय का अधिकतर भाग अपनी बीमारी में अपने बच्चों की बीमारी में खर्च कर रहे हैं प्रदूषण की वजह से हमें बहुत तकलीफ हो रही है कृपया प्रदूषण फैला है।

पेड़ पौधे

हम आपको ऑक्सीजन देते हैं आपको खाने को देते हैं फल फ्रूट देते हैं प्रदूषण की वजह से हम पनप नहीं पाते और हमारे अंदर भी हानिकारक केमिकल उत्पन्न हो जाते हैं। जिससे जिसको आप खाकर बीमार पड़ जाते हो। कृपया प्रदूषण ना फैलाएं हमारी संख्या  बढ़ाएं।

धरती

कृपया प्रदूषण ना करें मैं मुझे बर्बाद ना करें। अगर मुझे नुकसान हुआ तो प्राकृतिक आपदा के लिए तुम ही जिम्मेदार होंगे।

वस्तुएं

प्रदूषण हमारी सुंदरता को खराब कर रहा है हमारे ऊपर धूल मिट्टी बढ़ जाती है और हमारी उम्र भी कम हो रही है।

 क्यों कोई हमारे बारे में नहीं सोचता आखिर क्यों जो लोग से विकास कर रहे हैं यह सिर्फ पैसा कमा रहे हैं सिर्फ अपने बच्चों के लिए लेकिन जब उनका बच्चों का भविष्य सुरक्षित नहीं रहेगा तो वह तरक्की करके क्या करेंगे जब हम ही नहीं रहेंगे तो ऐसे विकास का क्या फायदा जब हम ही नहीं होंगे तो ऐसी सुविधाओं का क्या फायदा जब हम किसी चीज का फायदा उठा सके तो हम क्या कर पाएंगे क्या हमें हेलमेट लगाकर सोना जगना पड़ेगा? क्या हमें अपनी धरती पर ही अंतरिक्ष यात्रियों की तरह रहना पड़ेगा ? प्यारे मित्रों अपने सभी भाई बहनों के  भविष्य के लिए चिंतित हूं हमारे साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं।

क्या बात है सभी चुप है।

 जहर फैलाने वाले चुप है।

जहर खाने वाले चुप है।

जो अन्नदाता थे वह  भी जहर फैला रहे हैं।

नेता एक दूसरे के ऊपर आरोप आरोप लगा रहे हैं

 बस मीडिया वाला शोर मचा रहा है।

प्रदूषण के कारण का नुकसान नुकसान हो रहा है।

पर बस मीडिया ही शोर मचा रही हैं

उसके समाधान ना तो कोई निकाल रहा है।

 ना उस पर कोई कार्रवाई हो रही है।

कमाल की बात है सभी चुप है।

इसका लोग इसलिए नहीं बोल रहे हैं 

क्योंकि खाली वह नहीं मर रहे हैं । 

सभी घुट घुट कर मर रहे हैं। 

और वह भी जहर फैलाने के लिए कहीं ना कहीं जिम्मेदार हैं।

सब धीरे-धीरे मर रहे हैं बच्चों का भविष्य बनाने के लिए

बच्चों को भविष्य में जहरीला वातावरण में भर रहे हैं

क्या बात है सभी

अब कोई कोई अभिनेता नहीं बोल रहा।

अब कोई खिलाड़ी नहीं बोल रहा।

अब कोई अभिनेता नहीं बोल रहा 

क्योंकि यह कोई जात पात का मामला नहीं है ।

यह तो सबके साथ है 

इसलिए कोई नहीं बोलेगा

 क्योंकि सभी इसके कारण है

 इसलिए कोई पोल नहीं खोलेगा

सहनशीलता के बात करने वाले चुप हैं

लोग चुप है

सब खामोश हैं

यह कोई जात पात की बात नहीं नहीं

 राजनीति का मुद्दा नहीं है

डॉक्टर बिजनेसमैन की कमाई हो रही है

लोगों को सिर्फ अपने से मतलब है दूसरों से नहीं।

वैज्ञानिक सिर्फ जिस चीज में फायदा होता उसका अविष्कार कर रहे हैं

सोशल वर्कर के लिए और भी मुद्दे हैं

 यह अकेला मुद्दा नहीं ।

और जो आवाज उठाते हैं उनकी कोई सुन नहीं रहा 

 सब प्रदूषण पर चर्चा तो कर रहे हैं।

 लेकिन उसके समाधान पर ध्यान नहीं दे रहे है।‌

इसके लिए सिर्फ एक सरकार एक उद्योगपति एक देश ही नहीं जिम्मेदार है बल्कि सभी देश और देश का हर व्यक्ति  जिम्मेदार हैं। इस समस्या को खत्म करने के लिए सभी लोगों को साथ देना होगा तभी हमें इस से मुक्ति मिल सकती है।

मेरी उन ही उन सभी नेताओं समर्थ व्यक्तियों व्यक्तियों से गुजारिश है कि वह जल्द से जल्द कार्रवाई करें क्योंकि एक व्यक्ति से इतना फर्क नहीं पड़ेगा जितना कि नेता और कानून से पड़ेगा।

 प्रदूषण से हाल बेहाल है।

 कहां सो रही सरकार है।

 हमको भी  तो जीने का अधिकार है।

 हमारे आने वाली पीढ़ी को भी जीने का अधिकार है।

 क्यों  हो रहा है हमारे ऊपर अत्याचार है। 

छोटा बच्चा भी जिसको किसी ने नहीं सिखाया

  वो भी अपने अधिकार जानता है।

 लेकिन बार-बार पढ़ाने और समझाने पर भी,

 लोगों को अपने कर्तव्य याद नहीं होते।

हम सब प्रदूषण फैलाने में जिम्मेदार है और हम कोशिश करें तो इसको हम रोक सकते हैं। प्रदूषण के कारण और इसके उपाय मैं आपको बताती हूं। जिससे कि हम सब मिलकर इस देश को और दुनिया को और अपने को अपने आप को बचा सकते हैं।।

सबसे पहले जागरूकता

लोगों को नहीं पता  नहीं पता कि वह क्या कर रही है उनकी उनके थोड़े लालच के कारण थोड़ी लापरवाही के कारण  से उनको उनके परिवार को उनके उनके भविष्य को कितना नुकसान हो सकता है। वह अपने आप को नहीं बल्कि पूरे दुनिया को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

मैं सबकी जिंदगी में जहर घोल रहा हूं मैं प्रदूषण बोल रहा हूं।

मैं जात पात ऊंच-नीच बड़ा छोटा विकसित अविकसित, जीव जंतु किसी में भी भेदभाव नहीं करता सबको एक साथ तोल रहा हूं।

मैं प्रदूषण बोल रहा हूं

मेरे दुश्मन है पेड़ पौधे साफ सफाई

मेरे दोस्त है प्लास्टिक और पेट्रोल

 मैं तो हमेशा के लिए एक झोल रहा हूं।

कोई नहीं रोकना चाहता मुझे सब स्वार्थी हो गए हैं।

बस मीडिया और नेताओं के लिए एक  ढोल रहा हूं ।

मैं प्रदूषण बोल रहा हूं।

प्रदूषण को रोकने के लिए हम क्या कर सकते हैं।

प्रदूषण को रोकने के लिए सबसे पहले इसके लिए जागरूकता की आवश्यकता है। कई लोगों को तो यही नहीं पता कि जो हम कार्य कर रहे हैं। उसका कितना बड़ा नुकसान है। वह अपना अपनों का और अपने देश का और अपनी दुनिया का कितना बड़ा नुकसान कर रहे है।इसलिए लोगों में जागरूकता और जानकारी जरूरी है। कुछ लोगों को जानकारी है लेकिन वह अपने स्वार्थ के कारण ज्यादा पैसा कमाने के कारण या जल्दी तरक्की खाने के लिए वह प्रदूषण फैला रहे हैं। इसलिए  मैं आपको अपने इस कहानी में इस किताब में प्रदूषण के बारे में बताऊंगी और किस प्रकार हमें जागरुक हो सकते हैं और किस प्रकार हम प्रदूषण रोक सकते हैं उसके बारे में कुछ बातें बताऊंगी कृपया करके अपनी जिंदगी अपने बच्चों की जिंदगी और अपने देश का भविष्य और दुनिया का भविष्य में जाने के लिए कृपया इस पर ध्यान दें और इस जानकारी को दूसरों तक भी फैलाए उसके लिए आप इस पेज को शेयर कर सकते हैं उन लोगों मे इसके लिए उनको जानकारी दे सकते हैं जागरूकता अभियान के दौरान हम आपको बताएंगे कि किस तरह से प्रदूषण फैलता है प्रदूषण क्या होता है और किस तरह से फैलता है। और किस तरह से हम इसे रोक सकते हैं।

अबकी बार दुनिया प्राकृतिक आपदा से नहीं बल्कि मनुष्य की गलतियों से बर्बाद होगी।

जान बूझकर जहर खिला रहे हैं  जहर बेच रहे हैं।

 बना रहे हैं।

 कुछ  अपनों के लिए,

 कुछ अपने लिए।

2. प्रदूषण क्या होता है और यह कैसे फैलता है और इसके क्या प्रभाव होते हैं

प्रदूषण 

 पर्यावरण में दूषक पदार्थों के प्रवेश के कारण प्राकृतिक संतुलन में पैदा होने वाले दोष को कहते हैं। प्रदूषक पर्यावरण को और जीव-जन्तुओं को नुकसान पहुंचाते हैं। प्रदूषण का अर्थ है – ‘हवा, पानी, मिट्टी आदि का अवांछित द्रव्यों से दूषित होना’, जिसका सजीवों पर प्रत्यक्ष रूप से विपरीत प्रभाव पड़ता है तथा पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान द्वारा अन्य अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ते हैं। वर्तमान समय में पर्यावरणीय अवनयन का यह एक प्रमुख कारण है।

प्रकृति द्वारा निर्मित वस्तुओं के अवशेष को जब मानव निर्मित वस्तुओं के अवशेष के साथ मिला दिया जाता है तब दूषक पदार्थों का निर्माण होता है। दूषक पदार्थों का पुनर्चक्रण नही किया जा सकता है।

किसी भी कार्य को पूर्ण करने के पश्चात् अवशेषों को पृथक रखने से इनका पुनःचक्रण वस्तु का वस्तु एवं उर्जा में किया जाता है।

पृथ्वी का वातावरण स्तरीय है। पृथ्वी के नजदीक लगभग 50 km ऊँचाई पर स्ट्रेटोस्फीयर है जिसमें ओजोन स्तर होता है। यह स्तर सूर्यप्रकाश की पराबैंगनी (UV) किरणों को शोषित कर उसे पृथ्वी तक पहुंचने से रोकता है। आज ओजोन स्तर का तेजी से विघटन हो रहा है, वातावरण में स्थित क्लोरोफ्लोरो कार्बन (CFC) गैस के कारण ओजोन स्तर का विघटन हो रहा है।

यह सर्वप्रथम 1980 के वर्ष में नोट किया गया की ओजोन स्तर का विघटन संपूर्ण पृथ्वी के चारों ओर हो रहा है। दक्षिण ध्रुव विस्तारों में ओजोन स्तर का विघटन 40%-50% हुआ है। इस विशाल घटना को ओजोन छिद्र (ओजोन होल) कहतें है। मानव आवास वाले विस्तारों में भी ओजोन छिद्रों के फैलने की संभावना हो सकता‌ है।

ओजोन स्तर के घटने के कारण ध्रुवीय प्रदेशों पर जमा बर्फ पिघलने लगी है तथा मानव को अनेक प्रकार के चर्म रोगों का सामना करना पड़ रहा है। ये रेफ्रिजरेटर और एयरकंडिशनर में से उपयोग में होने वाले फ़्रियोन और क्लोरोफ्लोरो कार्बन (CFC) गैस के कारण उत्पन्न हो रही समस्या है। आज हमारा वातावरण दूषित हो गया है। वाहनों तथा फैक्ट्रियों से निकलने वाले गैसों के कारण हवा (वायु) प्रदूषित होती है। मानव कृतियों से निकलने वाले कचरे को नदियों में छोड़ा जाता है, जिससे जल प्रदूषण होता है। लोंगों द्वारा बनाये गये अवशेष को पृथक न करने के कारण बने कचरे को फेंके जाने से भूमि (जमीन) प्रदूषण होता है।

प्रदूषण के मुख्य प्रकार  

वायु प्रदूषण: -वातावरण में रसायन तथा अन्य सुक्ष्म कणों के मिश्रण को वायु प्रदूषण कहते हैं। सामान्यतः वायु प्रदूषण कार्बन मोनोआक्साइड, सल्फर डाइआक्साइड, क्लोरोफ्लोरोकार्बन (सीएफसी) और उद्योग और मोटर वाहनों से निकलने वाले नाइट्रोजन आक्साइड जैसे प्रदूषको से होता है। धुआँ वायु प्रदूषण का परिणाम है। धूल और मिट्टी के सूक्ष्म कण सांस के साथ फेफड़ों में पहुंचकर कई बीमारियाँ पैदा कर सकते हैं।

जल प्रदूषण:- जल में अनुपचारित (अवाच्छित) घरेलू सीवेज के निर्वहन और क्लोरीन जैसे रासायनिक प्रदूषकों के मिलने से जल प्रदूषण फैलता है। जल प्रदूषण पौधों और पानी में रहने वाले जीवों के लिए हानिकारक होता है।

भूमि प्रदूषण:- ठोस कचरे के फैलने और रासायनिक पदार्थों के रिसाव के कारण भूमि में प्रदूषण फैलता है।

प्रकाश प्रदूषण:- यह अत्यधिक कृत्रिम प्रकाश के कारण होता है।

ध्वनि प्रदूषण:- अत्यधिक शोर जिससे हमारी दिनचर्या बाधित हो और सुनने में अप्रिय लगे, ध्वनि प्रदूषण कहलाता है।

रेडियोधर्मी प्रदूषण:- परमाणु उर्जा उत्पादन और परमाणु हथियारों के अनुसंधान, निर्माण और तैनाती के दौरान उत्पन्न होता है!

वायु प्रदूषण   

वायु प्रदूषण अर्थात हवा में ऐसे अवांछित गैसों, धूल के कणों आदि की उपस्थिति, जो लोगों तथा प्रकृति दोनों के लिए खतरे का कारण बन जाए। दूसरे शब्दों में कहें तो प्रदूषण अर्थात दूषित होना या गन्दा होना। वायु का अवांछित रूप से गन्दा होना अर्थात वायु प्रदूषण है।यहि प्रदुषवायु प्रदूषण के कुछ सामान्य कारण हैं:

वाहनों से निकलने वाला धुआँ।

औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला धुँआ तथा रसायन।

आणविक संयत्रों से निकलने वाली गैसें तथा धूल-कण।

जंगलों में पेड़ पौधें के जलने से, कोयले के जलने से तथा तेल शोधन कारखानों आदि से निकलने वाला धुआँ।

वायु प्रदूषण का प्रभाव       

वायु प्रदूषण हमारे वातावरण तथा हमारे ऊपर अनेक प्रभाव डालता है। उनमें से कुछ निम्नलिखित है

1 हवा में अवांछित गैसों की उपस्थिति से मनुष्य, पशुओं तथा पक्षियों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इससे दमा, सर्दी-खाँसी, अँधापन, श्रव का कमजोर होना, त्वचा रोग जैसी बीमारियाँ पैदा होती हैं। लंबे समय के बाद इससे जननिक विकृतियाँ उत्पन्न हो जाती हैं और अपनी चरमसीमा पर यह घातक भी हो सकती है।

2. वायु प्रदूषण से सर्दियों में कोहरा छाया रहता है, जिसका कारण धूएँ तथा मिट्टी के कणों का कोहरे में मिला होना है। इससे प्राकृतिक दृश्यता में कमी आती है तथा आँखों में जलन होती है और साँस लेने में कठिनाई होती है।

3. ओजोन परत, हमारी पृथ्वी के चारों ओर एक सुरक्षात्मक गैस की परत है। जो हमें सूर्य से आनेवाली हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाती है। वायु प्रदूषण के कारण जीन अपरिवर्तन, अनुवाशंकीय तथा त्वचा कैंसर के खतरे बढ़ जाते हैं।

4. वायु प्रदूषण के कारण पृथ्वी का तापमान बढ़ता है, क्योंकि सूर्य से आने वाली गर्मी के कारण पर्यावरण में कार्बन डाइ आक्साइड, मीथेन तथा नाइट्रस आक्साइड का प्रभाव कम नहीं होता है, जो कि हानिकारक हैं।

5. वायु प्रदूषण से अम्लीय वर्षा के खतरे बढ़े हैं, क्योंकि बारिश के पानी में सल्फर डाई आक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड आदि जैसी जहरीली गैसों के घुलने की संभावना बढ़ी है। इससे फसलों, पेड़ों, भवनों तथा ऐतिहासिक इमारतों को नुकसान पहुँच सकता है।

6. ध्वनि की अधिकता के कारण भी प्रदूषण होता है, जिसे हम ध्वनि प्रदूषण के रूप में जानते हैं। ध्वनि प्रदूषण का साधारण अर्थ है अवांछित ध्वनि जिससे हम चिड़चिड़ापन महसूस करते हैं। इसका कारण है- रेल इंजन, हवाई जहाज, जनरेटर, टेलीफोन, टेलीविजन, वाहन, लाउडस्पीकर आदि आधुनिक मशीनें। लंबे समय तक ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव से श्रवण शक्ति का कमजोर होना, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, उच्चरक्तचाप अथवा स्नायविक, मनोवैज्ञानिक दोष उत्पन्न होने लगते हैं। लंबे समय तक ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव से स्वाभाविक परेशानियाँ बढ़ जाती है।

जल प्रदूषण   

जल प्रदूषण का अर्थ है पानी में अवांछित तथा घातक तत्वों की उपस्तिथि से पानी का दूषित हो जाना, जिससे कि वह पीने योग्य नहीं रहता।

जल प्रदूषण के कारण   

जल प्रदूषण के विभिन्न कारण निम्नलिखित हैः

मानव मल का नदियों, नहरों आदि में विसर्जन।

सफाई तथा सीवर का उचित प्रबंध्न न होना।

विभिन्न औद्योगिक इकाइयों द्वारा अपने कचरे तथा गंदे पानी का नदियों, नहरों में विसर्जन।

कृषि कार्यों में उपयोग होने वाले जहरीले रसायनों तथा खादों का पानी में घुलना।

नदियों में कूड़े-कचरे, मानव-शवों और पारम्परिक प्रथाओं का पालन करते हुए उपयोग में आने वाले प्रत्येक घरेलू सामग्री का समीप के जल स्रोत में विसर्जन। जानवरों का मांस खून आदि पानी में डालना।

गंदे नालों,सीवरों के पानी का नदियों मे छोङा जाना।

जल प्रदूषण के प्रभाव     

जल प्रदूषण के निम्नलिखित प्रभाव हैः

इससे मनुष्य, पशु तथा पक्षियों के स्वास्थ्य को खतरा उत्पन्न होता है। इससे टाईफाइड, पीलिया, हैजा, गैस्ट्रिक आदि बीमारियां पैदा होती हैं।

इससे विभिन्न जीव तथा वानस्पतिक प्रजातियों को नुकसान पहुँचता है।

इससे पीने के पानी की कमी बढ़ती है, क्योंकि नदियों, नहरों यहाँ तक कि जमीन के भीतर का पानी भी प्रदूषित हो जाता है।

भूमि प्रदूषण  

भूमि प्रदूषण से अभिप्राय जमीन पर जहरीले, अवांछित और अनुपयोगी पदार्थों के भूमि में विसर्जित करने से है, क्योंकि इससे भूमि का निम्नीकरण होता है तथा मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है। लोगों की भूमि के प्रति बढ़ती लापरवाही के कारण भूमि प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है।

भूमि प्रदूषण के कारण      

भूमि प्रदूषण के मुख्य कारण हैं :

कृषि में उर्वरकों, रसायनों तथा कीटनाशकों का अधिक प्रयोग।

औद्योगिक इकाईयों, खानों तथा खादानों द्वारा निकले ठोस कचरे का विसर्जन।

भवनों, सड़कों आदि के निर्माण में ठोस कचरे का विसर्जन।

कागज तथा चीनी मिलों से निकलने वाले पदार्थों का निपटान, जो मिट्टी द्वारा अवशोषित नहीं हो पाते।

प्लास्टिक की थैलियों का अधिक उपयोग, जो जमीन में दबकर नहीं गलती।

घरों, होटलों और औद्योगिक इकाईयों द्वारा निकलने वाले अवशिष्ट पदार्थों का निपटान, जिसमें प्लास्टिक, कपड़े, लकड़ी, धातु, काँच, सेरामिक, सीमेंट आदि सम्मिलित हैं।

भूमि प्रदूषण का प्रभाव      

भूमि प्रदूषण के निम्नलिखित हानिकारक प्रभाव हैः

कृषि योग्य भूमि की कमी।

भोज्य पदार्थों के स्रोतों को दूषित करने के कारण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक।

भूस्खलन से होने वाली हानियाँ।

जल तथा वायु प्रदूषण में वृद्धि ।

पर्यावरण प्रदूषण में व्यवसाय की भूमिका

पर्यावरण को नियंत्रित करने में व्यवसाय की तीन प्रकार की भूमिका हो सकती हैः निवारणात्मक, उपचारात्मक तथा जागरूकता।   

निवारणात्मक भूमिका    

इसका अर्थ है कि व्यावसायिक इकाईयाँ ऐसा कोई भी कदम न उठाए, जिससे पर्यावरण को और अधिक हानि हो। इसके लिए आवश्यक है कि व्यवसाय सरकार द्वारा लागू किए गए प्रदूषण नियंत्रण संबंधी सभी नियमों का पालन करे। मनुष्यों द्वारा किए जा रहे पर्यावरण प्रदूषण के नियंत्रण के लिए व्यावसायिक इकाईयों को आगे आना चाहिए।

उपचारात्मक भूमिका        

इसका अर्थ है कि व्यावसायिक इकाइयाँ पर्यावरण को पहुँची हानि को संशोध्ति करने या सुधरने में सहायता करें। साथ ही यदि प्रदूषण को नियंत्रित करना संभव न हो तो उसके निवारण के लिए उपचारात्मक कदम उठा लेने चाहिए। उदाहरण के लिए वृक्षारोपण ; वनरोपण कार्यक्रमद्ध से औद्योगिक इकाईयों के आसपास के वातावरण में वायु प्रदूषण को कम किया जा सकता है। व्यवसाय की प्रकृति तथा क्षेत्र

जागरूकता संबंध

इसका अर्थ है लोगों को (कर्मचारियों तथा जनता दोनों को) पर्यावरण प्रदूषण के कारण तथा परिणामों के संबंध में जागरूक बनाएँ, ताकि वे पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने की बजाय ऐच्छिक रूप से पर्यावरण की रक्षा कर सकें। उदाहरण के लिए व्यवसाय जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन करे। आजकल कुछ व्यावसायिक इकाईयां शहरों में पार्कों के विकास तथा रखरखाव की जिम्मेदारियाँ उठा रही हैं, जिससे पता चलता है कि वे पर्यावरण के प्रति जागरूक हैं।

प्रदुषण एक प्रमुख पर्यावरणीय मुद्दा बन गया है क्योकि यह हर आयु वर्ग के लोगों और जानवरों के लिए स्वास्थ्य का खतरा है। हाल के वर्षों में प्रदूषण की दर बहुत तेजी से बढ़ रही है क्योकि औद्योगिक अपशिष्ट पदार्थ सीधे मिट्टी, हवा और पानी में मिश्रित हो रहीं हैं। हालांकि हमारे देश में इसे नियंत्रित करने के लिए पूरा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसे गंभीरता से निपटने की जरूरत है अन्यथा हमारी आने वाली पीढ़ी बहुत ज्यादा बुरा परिणाम भुगतेगी।

प्रदूषण को फैलाने के लिए हम सभी जिम्मेदार हैं और हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम प्रदूषण को कैसे रोके मैं आपको कुछ उपाय बताऊंगी जिससे कि हम सब मिलकर प्रदूषण को रोक सकते हैं और अपने परिवार वालों को अपनी धरती को सुंदर और साफ मना सकते हैं।

आसान भाषा में

हम सब मिलकर प्रदूषण को कैसे दूर कर सकते हैं।

 सरकार के लिए

 1. जो फैक्ट्री  या वस्तु प्रदूषण फैलाते हैं प्रतिबंधित कर दिया जाए।

 2.पेड़ पौधों पर ज्यादा ध्यान दें और सब घर में पेड़ पौधे अनिवार्य कर दी जाए।

3.स्कूलों में पेड़ पौधों की जानकारी प्रदूषण की जानकारी अनिवार्य कर दी जाए। स्कूलों के बच्चों को प्रदूषण दूर करने में भागीदार बनाया जाए।

4.जिस चीज को प्रतिबंधित बंद नहीं कर सकते  जैसे कि प्लास्टिक पेट्रोल उन्हें महंगा कर दिया जाए ताकि वह आम ना बन पाए बहुत ही ज्यादा जरूरत होने पर उसे खरीदेंगे और इसका कम से कम प्रयोग करेंगे। क्योंकि  प्लास्टिक सस्ती है  इसलिए लोग प्लास्टिक का प्रयोग ज्यादा करने लगे है। अगर उस पर ज्यादा टैक्स होगा तो वह महंगी हो जाएगी और लोग इसे कम खरीदेंगे।

5. रीयूज रीसाइकिल करने वाले लोगों को सम्मान किया जाए।

6.जो पर्यावरण के लिए काम कर रहे हैं उन्हें सम्मानित किया जाए ताकि दूसरों लोगों में भी पर्यावरण के प्रति लगाओ उत्पन्न हो।

7.जो फैक्ट्रियां प्रदूषण या गंदगी फैल आती है उन्हें शहरों से दूर लगाया जाए।

8.जो भी चीजें प्रदूषण से मुक्त पर्यावरण को प्रदूषण से मुक्त करती है उसकी अधिकता की जाए और उस को बढ़ावा दिया जाए जैसे कि पेड़ पौधे। सौर ऊर्जा का प्रयोग

9.सोलर ऊर्जा का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करने के लिए बढ़ावा देना चाहिए।

10.जंगलों में आग लगने के कारण घरों में आग लगने के कारण कूड़ेदान में या किसी भी वजह से आग लगने के कारण भी प्रदूषण फैलता है। सरकार को चाहिए कि सभी परिवार और संस्था के लिए अग्निशामक जरूर अनिवार्य कर दे। ताकि आग जल्दी से जल्दी बुझाई जा सके।

11.प्रदूषण का एक मुख्य कारण धूल मिट्टी भी है।धूल मिट्टी ना उड़े इसके लिए सरकार को इसके लिए योजना बनानी चाहिए सड़कें अच्छी तरह से साफ हो सके तो धूल मिट्टी ना उडे उसके लिए पानी डालें। और लोगों को जागरुक करें।

12. मांसाहार पर प्रतिबंध शाकाहारी भोजन और विगन को भोजन बढ़ावा

13. रीयूज रीसाइकिल पर ज्यादा जोर दिया जाए

प्रदूषण के कारण मांसाहार से होने वाला प्रदूषण भी है। मांस खाकर मांस खाकर उसका अपशिष्ट पदार्थ नालियों में डाल देते हैं और वह नदियों में चला जाता है जैसे कि खून और बचा हुआ मांस इससे भी जल प्रदूषण होता है इसलिए सरकार को चाहिए कि वह मांसाहार पर   प्रतिबंध लगाए

व्यापारी के लिए

1.जो चीज प्रदूषण करती है उसका या तो उत्पादन ना करें या अपशिष्ट पदार्थ को निपटान करें।

2.ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधों लगाए और प्राकृतिक संसाधन तथा  सौर ऊर्जा का प्रयोग करें

3.अपनी फैक्ट्रियों को रेजिडेंट एरिया से दूर रखें।

4.पैकिंग का कम से कम समान हो। पैकिंग ऐसी हो कि वह दोबारा भी प्रयोग की जा सके जैसे कि थेली का प्रयोग थैले की तरह किया जा सके  पैकिंग ऐसी हो कि बाद में उसका प्रयोग डिब्बा बाल्टी मगगा आदि में किया जा सके। या किसी चीज में काम आ सके। रीसायकल हो सके।

5.जो चीज पैकिंग हो वह दोबारा भी  प्रयोग हो सके इस तरह से बनाएं।

6.खाली पैकिंग व पैकिंग बॉक्स को वापस ले।

7.उस चीज का ज्यादा का प्रयोग करें जो प्रदूषण कम फैलाती है।

सामान्य लोगों के लिए

1.जो भी चीज प्रदूषण फैलाती है  उसका प्रयोग बंद कर दें ।क्योंकि यह सभी के स्वास्थ्य को को भी नुकसान देती है या उसका प्रयोग कम से कम करें 2.पेड़ पौधे ज्यादा से ज्यादा लगाएं

3.एसी, फ्रिज , प्लास्टिक, पेट्रोल डीजल का प्रयोग कम से कम करें।

4.जितनी ज्यादा हो सके जागरूकता फैलाएं।

5.पैकिंग का सामन न खरीद कर खुला सामान खरीदें।

6.जब हम प्रदूषण फैलाने वाली चीज खरीदेंगे ही नहीं तो व्यापारियों से बनाएंगे ही नहीं इसलिए प्लास्टिक का पूर्ण तरह से विरोध करें।

7.विकल्प का प्रयोग करें जैसे प्लास्टिक की बाल्टी की जगह स्टील की बाल्टी सिल्वर की बाल्टी।

प्लास्टिक की थैली की बजाए कपड़े का थैला।

प्लास्टिक की बोतल की बजाय स्टील के बर्तन।

9.सरकार पर दबाव बनाया कि वह प्रदूषण मुक्त शहर कर रखे रखे।

10.मांसाहार का प्रयोग ना करें

वैज्ञानिकों के लिए।

1.ऐसे अविष्कार करें जिससे कि प्रदूषण कम हो।

2.जो प्रदूषण कारी गैस है उसको दोबारा रिव्यूज रीसायकल किया जाए। जैसे कि कार्बन का प्रयोग।

जो जरूरत का सामान ना हो उसका उसका प्रयोग किसी प्रयोग में आने वाली आने वाली वस्तु के रूप में करें या उसका दान कर दे।

प्रदूषण को कम करना है तो  हम सबको एक फौजी की तरह ही सोचना होगा

 फौजी बनना होगा

 तभी प्रदूषण कम हो सकता है 

फौजी की तरह त्याग करना होगा 

तभी प्रदूषण कम हो सकता है।

प्रदूषण से बचने के उपाय

1.अपने आसपास पेड़ पौधे ज्यादा लगाएं 

2.जहां प्रदूषण हो वहां  ना जाए ना जाए

3.जाना जरूरी हो तो मास्क पहनकर जाए

4.वहां पर पर लंबी-लंबी सांसे ना ले

5.प्रदूषण युक्त  जगह पर योगा ना करें

6.अगर प्रदूषण ज्यादा हो तो पानी का छिड़काव करें

7.अदरक का प्रयोग करें

8.प्रदूषण से दूर करने वाली चीजों को खाएं

9. मांस का प्रयोग बंद कर दे।

10.ऑर्गेनिक खेती का सामान प्रयोग करें

11.हो सके तो अपने घर पर ही 

तुलसी एलोवेरा नीम आदि से युक्त पदार्थ को घर में ही बनाए।

12.जिस जिससे प्रदूषण कम होता है उस चीज को ही जलाएं

13.  चिमनी का प्रयोग करें।

14.एयरप्यूरीफायर का प्रयोग करें।

15.प्राकृतिक संसाधनों का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करें।

16.पैदल चले साइकिल के इस्तेमाल करें या बैटरी से चलने वाले वाहन का प्रयोग करें।

पैदल चलना स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है।

17. दिखावे से बचें जो  जरूरी है उसी को करो। वही समान खरीदो जो उपयोगी है।

कृपया इस  को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और प्रदूषण को कम करने के लिए पर्यावरण को शुद्ध करने में अपने बच्चों का भविष्य बनाने में

धन्यवाद।

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